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लेखक परिचय

यीशु प्रसाद बन्छोर

'रक्षक: बागेश्वर धाम' के लेखक यीशु प्रसाद बन्छोर एक गहरे विचारक और आध्यात्मिक अन्वेषक हैं। उनकी लेखनी में सनातन धर्म की जड़ों को छूती हुई एक असीम गहराई है।

उन्होंने इस पुस्तक के माध्यम से केवल बागेश्वर धाम की घटनाओं का संकलन नहीं किया है, बल्कि एक ऐसा दर्पण प्रस्तुत किया है जिसमें हर सनातनी अपनी आस्था और आत्म-जागरूकता की छवि देख सकता है। उनका मानना है कि शब्द केवल विचार नहीं, बल्कि ऊर्जा का प्रवाह होते हैं।

“कलम जब सत्य और आस्था के रस में डूबकर चलती है, तो वह केवल इतिहास नहीं रचती, आत्माओं को झकझोर देती है।”

बागेश्वर धाम की कहानी

उत्पत्ति और आस्था का केंद्र

मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित गढ़ा गाँव मात्र एक स्थान नहीं, बल्कि करोड़ों की आस्था का महातीर्थ बन गया है। बालाजी के आशीर्वाद और सन्यासी बाबा की कृपा से यहाँ एक नई आध्यात्मिक चेतना का उदय हुआ।

पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की संकल्प यात्रा

अभावों और संघर्षों के बीच पले-बढ़े एक साधारण युवा ने कैसे सन्यासी बाबा के आदेशों का पालन किया और खुद को पूर्णतः समाज, धर्म और बालाजी के चरणों में समर्पित कर दिया, यह इस पुस्तक का मर्म है।

दिव्य दरबार: चमत्कार या विज्ञान?

बिना पूछे लोगों के मन की बात जान लेना और उनकी समस्याओं का आध्यात्मिक-वैज्ञानिक समाधान प्रस्तुत करना। यह केवल चमत्कार नहीं, बल्कि उच्च कोटि की ध्यान साधना और गुरु-कृपा का साक्षात प्रमाण है।

सनातन और सांस्कृतिक महत्व

आज बागेश्वर धाम केवल समस्याओं का समाधान केंद्र नहीं, बल्कि घर-वापसी, गौ-सेवा, निर्धन कन्या विवाह और सनातन धर्म को वैश्विक पटल पर स्थापित करने का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। 'रक्षक' इसी सांस्कृतिक पुनर्जागरण का दस्तावेज है।

सम्पूर्ण कथा विस्तार से पढ़ें

पुस्तक के सभी मुख्य अंशों और विषयों पर एक संक्षिप्त नज़र डालें।

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